शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2008

मैं हनुमान नहीं हूं

मैं हनुमान नहीं हूं
जो अपना सीना चीर के दिखलाऊं
कि मेरे सीने में राम बसते हैं
क्योंकि इस कलयुग में हर जगह रावण पूजे जाते हैं
भले हर घर-मंदिर में राम बसते हैं
मैं हनुमान नहीं हूं जो अपनी पूंछ में आग लगा लंका को जलाऊं

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